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शनि प्रधान जातक

 

8, 17 व 26 तारीख को जन्मे शनि प्रधान जातक गंभीर स्वभाव व सशक्त व्यक्तित्व वाले होते हैं। ऐसे जातक सामान्यत: अन्य लोगों के लिए सौभाग्यशाली सिद्ध होते हैं। अपने आप में खोये, दीन-दुनियां से बेखबर, एकांतप्रिय व मन की बात किसी भी न बताने वाले ऐसे जातक जीवन में यदा-कदा ऐसा कर गुजरते हैं, जिसके कारण लोग मरने के बाद इन्हें अधिक महत्व देते हैं।ऐसे जातकों का जीवन उथल-पुथल से भरा होता हैं। यधपि परिश्रम अधिक करते हैं, लेकिन सफलता कम ही मिलती है। इनकी रूचि दर्शन, तंत्र, धर्म के प्रति अधिक रहती है। जीवन का अंत प्राय: दुखद ही रहता हैं दमपत्य जीवन भी ऐसे जातकों का कटुतापूर्ण रहता है। जातक तीक्ष्ण बुद्धि के, विचारशील, न्यायविद होते हैं।  लेकिन यदि ये लोहे से संबधित व्यावसाय करें और साढे़ पांच रती का नीलम धारण करें तो कुछ हद तक जीवन मे सफल रह सकते हैं।

ऐसे जातकों का रहन-सहन भी प्राय: अजीबो-गरीब देखा गया है। जैस जूते अच्छे होंगे तो कपड़े पुराने होंगे तो कपड़े पुराने होंगे तो कपड़े नए होंगें तो जूते फटेहाल होंगे। अर्थात नूतनता व पुरातनता को ये गले लगाए रहते है । ऐसे जातकों में महात्वाकांक्षा जाग जाए तो ये कुर्बानी देकर उच्च पदों पर आसीन होते हैं। धन से इन्हें कुछ हद तक लगाव रहता है। ऐसे जातकों में महात्वाकाक्षा प्राय: सुप्त रहती है। यदि महात्वाकांक्षा जाग जाए तो ये कुर्बानी देकर उच्च पदों पर आसीन होते हैं। कदम-कदम पर इन्हें अपमान के घूट पीने पड़ते हैं। धन से इन्हें कुछ हद तक लगाव रहता हैं।

ऐसे जातकों में महत्वकाक्षां प्राय: सुप्त रहती है। यदि महत्वकाक्षाएं जाग जाए तो ये कुर्बानी देकर उच्च पदों पर आसीन होते हैं। कदम-कदम पर इन्हे अपमान के घूट पीने पड़ते हैं। धन से इन्हें कुछ हद तक लगाव रहता है। ऐसे जातक शनि की अवधि में कोर्इ कार्य प्रारंभ करें तो सफलता अर्जित होते है। अंक 8 का संबंध भौतिकता व आध्यातिमकता दोंनों से है। अत: इस अंक की व्याख्या करना जरा टेढी़ खीर जैसा है। यह अंक अमिट भाग्य से जुड़ा है। भाग्य चाहे व्यकित विशेष का हो या किसी भी राष्ट्र का। यह अंक क्योंकि शनि के स्वामित्व का है। अत: शनि को भाग्य का ग्रह भी कहा जाता है।

 

शुभाशुभ समय
अंक 8 वाले शनि प्रधान जातकों के लिए 20 सितंबर से 25 अक्तूबर व 20 जनवरी से 20 फरवरी अथवा 21 दिसंबर से 20-27 जनवरी की समयावधि श्रेष्ठ होती हैं। इसके विपरीत र्माच व अप्रैल का महीना प्राय: अशुभ रहता है। इसके अतिरिक्त जब शनि वक्री या अस्त हो, वह समय भी प्रतिकूल रहता है। इस काल में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

रोग
ऐसे जातकों को सामान्यत: उन्माद, गठिया, रक्तचाप, शिरोशूल, वात, भगंदर, अल्सर, तपेदिक आदि रोग रखना चाहिए।

शुभ रत्न या उपरत्न
प्रमुख रत्न नीलम है। नीलम न मिले तो नीलिमा, जामुनिया, कटैला, काला मोती शनिवार के दिन जब पुष्य नक्षत्र हो तब पांच रती का पंचधातु में जड़वाकर मध्यमा उंगली में पहनें। नीलम खरीदते समय ध्यान रखें  कि वह चमकीला, चिकना, नीला आभावाला, पारदर्शी होना चाहिए।

जड़ी-बूटी
रत्न के अभाव में शमी वृक्ष की जड़ शनिवार को पुष्य नक्षत्र में काले धागे में बांधकर दार्इं भुजा पर धारण करने पर भी अनुकलता प्राप्त होती है।

दान की वस्तुएं
शनि से संबंद्ध वस्तुओं अर्थात् काली गाय, भैंस, बकरी, काला छाता, जूते, काले तिल, जामुन, काले वस्त्र, काले उड़द, लोहा, तेल, केतकी पुष्प आदि का दान करना चाहिए।

शुभ वर्ष
शनि प्रधान जातकों के लिए वे वर्ष जिनमें 8 का भाग पूरा-पूरा जाता हो, शुभ होते हैं। जीवन के 17, 35, 62, 80वें वर्ष अतिशुभ होते है।

शुभ दिन
शनिवार का दिन हर तरह से शुभ होता है। तदपि रविवार व सोमवार का दिन भी यदा-कदा अनुकूल सिद्ध होता है।

तारीख
वे तारीखे, जो मूलांक 8 से संबंद्ध हों, शुभ होती हैं। जैसे 17, 26 आदि। इन तारीखों में कोर्इ भी शुभ कार्य किया जाए तो सफलता मिलती है।

शुभ रंग
काला, बैगनी, भूरा, सलेटी, नीला आदि रंग सौभाग्यकारी है।

मैत्री
ऐसे जातकों की मैत्री उन स्त्री-पुरुषों के साथ सफल रहती है, जिनका जन्म 8, 17, 26 अथवा 2, 4, 6, 8, 12, 20, 24, 26 तारिखों को हुआ हो। ऐसे ही लोग मददगार साबित होते हैं। अत: व्यापार-व्यवसाय में साझा करना हो तो  ऐसे ही लोगों से संपर्क साधना चाहिए, जिनका मूलांक या जन्मांक 8 हो। इनसे साझा करने में लाभप्रद सिथति रहेगी।

वर्जना
शनि प्रधान जातकों को स्वास्थ्य व भाग्योदय की दॄष्टि से खान-पान में सात्विकता बरतनी चाहिए।

 





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