shani aor uska svroop

वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि साढ़े साती की व्याख्या

सर्वप्रथम ये भली प्रकार समझना आवश्यक है की शनि की साढ़ेसाती किस प्रकार आती है I शनि की साढ़ेसाती का सीधा सम्बन्ध चंद्रमा से रहता है I जब भी शनि गोचर होकर चन्द्रमा स्थित राशि से पहले घर में आता है तो शनि की साढ़ेसाती आरम्भ हो जाती है और चन्द्रमा से अगली राशि रहने […]

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शनि और उसका स्वरूप

शनि और उसका स्वरूप शनिदेव जी के स्वरूप, प्रकृति, कार्य क्षमता आदि के बारे में कहा जाता है की शनि देव क्रूर ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है I आंग्ल भाषा में शनि को ‘SATURAN’ कहते हैं तो फ़ारसी में केदवान व् संस्कृत में असित , मंद , शनेश्चर, सूर्य पुत्र आदि नामो से

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शनि अष्टोत्तरशत नामावली

शनि अष्टोत्तरशत नामावली ॐ शं शनिश्चराय नमःॐ शं शान्ताय नमःॐ शं सर्वाभिष्ट्प्रदायिने नमःॐ शं शरण्याय नमःॐ शं वरेण्याय नमःॐ शं सर्वेशाय नमःॐ शं सौम्याय नमःॐ शं सुरवन्द्याय नमःॐ शं सुरलोकविहारिने नमःॐ शं सौम्याय नमःॐ शं सुखासनोपविष्टाय नमःॐ शं सुन्दराय नमःॐ शं घनाय नमःॐ शं घनरूपाय नमःॐ शं घनसारविलेपनाय नमःॐ शं खद्योताय नमःॐ शं मन्दाय नमःॐ

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शनिवार व्रत – पूजन व् व्रत -कथा

शनिदेव के निमित व्रत शुक्ल पक्ष के शनिवार से प्रारम्भ क्र न्यूनतम ७, १९ व् अधिकतम ५१ करने चाहिए I व्रत वाले दिन शनिदेव की व्रत कथा पड़नी या सुननी चाहिए और शनिदेव की पूजा कर प्रतिमा को काले वस्त्र पहनाने चाहिए I इस दिन ताम्बे या लोहे के पात्र में लौंग, इलाइची, लोहे की

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शनैश्चर तीर्थ व सिद्ध पीठ

शनैश्चर तीर्थ व सिद्ध पीठ गोदावरी नदी के किनारे अश्वत्थ तीर्थ व् पिप्पल तीर्थ के साथ ही शनैश्चर तीर्थ भी है, जिसकी बड़ी महिमा है I संक्षिप्त ब्रह्मपुराण में कथा आती है कि विंध्य पर्वत नित्य ऊपर की ओर बढ़ रहा था I इस बात से देवता चिंतित हो गए ओर वे अगस्त्य मुनि के

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रावण की कैद से शनिदेव की मुक्ति

रावण की कैद से शनिदेव की मुक्ति हनुमान जी ने एक बार कृपा करके महाकाल सहित शनिदेव जी को रावण की कैद से मुक्त कराया था I कथा है कि लंका का राजा रावण न केवल महायोद्धा, तपस्वी, मायावी था, वरन वह भगवान शिव का भी परम् भक्त था I एक बार उसने तपस्या करके

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नल-दमयंती पर शनि देव जी का प्रकोप

नल-दमयंती पर शनि देव जी का प्रकोप कहते हैं कि महाराजा नल पराक्रमी, सद्गुणी, यशस्वी, प्रजापालक, धर्मज्ञ होने के साथ-साथ रूप वान भी थे I उनके छोटे भाई का नाम श्रीपुष्कर था I रानी दमयंती भी बहुत रूपवती थी उनके रूप सौंदर्य पर देवता भी मोहित थे और किसी तरह से उनको पाने को लालायित

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रघुवंशी राजा का शनिदेव जी को शाप

रघुवंशी राजा का शनिदेव जी को शाप पूर्वकाल में रघुवंश में उत्पन्न महाराजा हरिस्चन्द्र सत्य निष्ठ व् दानी स्वभाव के लिए जगत विख्यात थे I शनि की साड़ेसातीके प्रभाववश उन्होने न केवल अपने पुत्र व् पत्नी को बेच दिया था बल्कि स्वंय को भी डोम के हाथो बेच दिया था I कथा ये कि जब

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शनिदेव पर तेल चढ़ाने का रहस्य

शनिदेव पर तेल चढ़ाने का रहस्य एक बार हनुमान जी भगवान श्री राम की भक्ति में लीन थे और ये सर्वविदित है कि शनिदेव जी स्वभाव से उद्दंड थे तो उन्होने उछल-कूद मचाते हुए राम भक्त हनुमान जी को युद्ध के लिए ललकारने लगे I हनुमान जी ने भक्ति बीच में छोड़ कर शनिदेव जी

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शनि देव जी को विकलांगता कैसे आयी ?

शनि देव जी को विकलांगता कैसे आयी ? कथा के अनुसार एक बार मुनि पिप्पलाद के पिता यमुना किनारे अपने आश्रम में तपस्या में लीन थे और काल-क्रमानुसार शनि ने उन्हें न केवल विपिन्न बना दिया था वरन रुग्ण भी बना दिया था I मुनि पिप्पलाद की माता भली भांति जानती थी कि उनके पति

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