Chaitra Navratri, Gangaur Teej and Angarak Chaturthi fast on Monday, significance of gangaur teej in hindi, angarak chaturthi fast | चैत्र नवरात्रि, गणगौर तीज और अंगारक चतुर्थी व्रत सोमवार को: देवी दुर्गा, भगवान शिव, गणेश जी के साथ ही मंगलदेव की पूजा का शुभ योग, शिवलिंग पर चढ़ाएं लाल गुलाल


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52 मिनट पहले

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मंगलवार, 1 अप्रैल को देवी दुर्गा, भगवान शिव, गणेश जी के साथ ही मंगलदेव की पूजा का शुभ योग बन रहा है। सोमवार को चैत्र नवरात्रि, गणगौर तीज और अंगारक चतुर्थी है। इस कारण मंगलवार को पूजा-पाठ के साथ ही दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन शिव-पार्वती की पूजा की जाती है, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और प्रेम बनाए रखने के लिए व्रत किया जाता है। इस तिथि पर महिलाएं मिट्टी से शिव प्रतिमा यानी गण और देवी पार्वती प्रतिमा यानी गौर बनाती हैं। फिर इनकी विधिवत पूजा करती हैं।

माना जाता है कि जो महिलाएं ये व्रत करती हैं, उनका वैवाहिक जीवन भगवान की कृपा से सुखी बना रहता है। अविवाहित कन्याएं अच्छा पति पाने की कामना से ये व्रत करती हैं। ये व्रत सौभाग्य और सुखद जीवन देने वाला माना जाता है।

महिलाएं इस दिन सौलह श्रृंगार करती हैं और फिर पूजा करती हैं। पौराणिक कथा है कि पुराने समय में गौरा यानी देवी पार्वती ने भी शिव जी को पति रूप में पाने के लिए ये व्रत किया था। इसके बाद देवी को पति रूप में शिव जी मिले थे।

ऐसे कर सकते हैं शिव-पार्वती यान गण-गौर की पूजा

  • सबसे पहले स्वयं स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थल और पूजन सामग्री को भी शुद्ध करें।
  • भगवान शिव और देवी पार्वती की मूर्ति को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।
  • प्रतिमाओं पर जल अर्पित करें।
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर) से अभिषेक करें, फिर शुद्ध जल चढ़ाएं।
  • बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला), धतूरा और आक के फूल, सुगंधित चंदन या भस्म, धूप और दीप जलाएं।
  • शिव-पार्वती के मंत्रों जप करें। ऊँ नम: शिवाय और ऊँ गौर्ये नम: मंत्र जपें। महामृत्युंजय मंत्र का जप भी कर सकते हैं।
  • भगवान को फल, मिठाई या भोग अर्पित करें। शिव जी की आरती करें। भगवान से सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना करें।
  • अंत में भगवान से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।

अंगारक चतुर्थी पर करें गणेश जी की पूजा

अंगारक चतुर्थी पर भगवान गणेश के लिए व्रत और पूजा करें। गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं। मंगलवार को मंगलदेव की पूजा करें। मंगल की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए शिवलिंग पर लाल गुलाल, लाल फूल, मसूर की दाल चढ़ाएं। इस दिन हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

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