साढ़ेसाती से तात्पर्य

साड़ेसाती से तात्पर्य

सर्वप्रथम ये भली प्रकार समझना आवश्यक है की शनि की साढ़ेसाती किस प्रकार आती है I शनि की साढ़ेसाती का सीधा सम्बन्ध चंद्रमा से रहता है I जब भी शनि गोचर होकर चन्द्रमा स्थित राशि से पहले घर में आता है तो शनि की साढ़ेसाती आरम्भ हो जाती है और चन्द्रमा से अगली राशि रहने तक साढ़ेसाती रहती है Iउदाहरण के लिए मोहनलाल की सिंह राशि है I राशि कुंभ में सिंह पूर्व कर्क राशि तथा सिंह से अगली राशि कन्या है I अतः कर्क से कन्या तक शनि का भ्रमण काल साढ़े सात वर्ष होगा I ढाई वर्ष कर्क ढाई वर्ष सिंह ढाई वर्ष कन्या, शनि साढ़ेसाती का प्रभाव सिर धड़ व पैरों के रूप में तीन भाग में ढाई- ढाई वर्ष रहता है I

क्रम संo राशि प्रथम ढाई वर्ष द्वितीय तृतीय
मेष
मीन
मेष
वृष
वृष
मेष
वृष
मिथुन
मिथुन
वृष
मिथुन
कर्क
कर्क
मिथुन
कर्क
सिंह
सिंह
कर्क
सिंह
कन्या
कन्या
सिंह
कन्या
तुला
तुला
कन्या
तुला
वृश्चिक
वृश्चिक
तुला
वृश्चिक
धनु
धनु
वृश्चिक
धनु
मकर
१०
मकर
धनु
मकर
कुम्भ
११
कुम्भ
मकर
कुम्भ
मीन
१२
मीन
कुम्भ
मीन
मेष

*** ॐ कृष्णांगाय विद्य्महे रविपुत्राय धीमहि तन्न: सौरि: प्रचोदयात***

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