
तुला दान का शनिदेव के साथ क्या संबंध होता है ?
तुला दान और शनिदेव के बीच गहरा ज्योतिषीय और धार्मिक संबंध है। यह उपाय विशेष रूप से शनिदेव की कृपा प्राप्त करने और उनके अशुभ प्रभावों को शांत करने के लिए किया जाता है।
तुला दान और शनिदेव के बीच गहरा ज्योतिषीय और धार्मिक संबंध है। यह उपाय विशेष रूप से शनिदेव की कृपा प्राप्त करने और उनके अशुभ प्रभावों को शांत करने के लिए किया जाता है।
शनैश्चर तीर्थ व सिद्ध पीठ गोदावरी नदी के किनारे अश्वत्थ तीर्थ व् पिप्पल तीर्थ के साथ ही शनैश्चर तीर्थ भी है, जिसकी बड़ी महिमा है Iसंक्षिप्त ब्रह्मपुराण में कथा आती है कि विंध्य पर्वत नित्य ऊपर की ओर बढ़ रहा था I इस बात से देवता चिंतित हो गए ओर वे अगस्त्य मुनि के पास
शनिदेव जी के स्वरूप, प्रकृति, कार्य क्षमता आदि के बारे में कहा जाता है की शनि देव क्रूर ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है I आंग्ल भाषा में शनि को ‘SATURAN’ कहते हैं तो फ़ारसी में केदवान व् संस्कृत में असित , मंद , शनेश्चर, सूर्य पुत्र आदि नामो से जाना जाता है I
शनि अष्टोत्तरशत नामावली ॐ शं शनिश्चराय नमःॐ शं शान्ताय नमःॐ शं सर्वाभिष्ट्प्रदायिने नमःॐ शं शरण्याय नमःॐ शं वरेण्याय नमःॐ शं सर्वेशाय नमःॐ शं सौम्याय नमःॐ शं सुरवन्द्याय नमःॐ शं सुरलोकविहारिने नमःॐ शं सौम्याय नमःॐ शं सुखासनोपविष्टाय नमःॐ शं सुन्दराय नमःॐ शं घनाय नमःॐ शं घनरूपाय नमःॐ शं घनसारविलेपनाय नमःॐ शं खद्योताय नमःॐ शं मन्दाय नमःॐ
शनि देव हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण देवता हैं। उन्हें न्याय के देवता और कर्मों के फल देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। शनि देव सूर्य और छाया (संवर्णा/सवर्णा) के पुत्र हैं और नवग्रहों में से एक हैं, जो ज्योतिष में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। शनि देव का वाहन गिद्ध या कौआ
रावण की कैद से शनिदेव की मुक्ति हनुमान जी ने एक बार कृपा करके महाकाल सहित शनिदेव जी को रावण की कैद से मुक्त कराया था I कथा है कि लंका का राजा रावण न केवल महायोद्धा, तपस्वी, मायावी था, वरन वह भगवान शिव का भी परम् भक्त था I एक बार उसने तपस्या करके
Raghuvanshi king’s curse on Shanidev ji नल-दमयंती पर शनि देव जी का प्रकोप कहते हैं कि महाराजा नल पराक्रमी, सद्गुणी, यशस्वी, प्रजापालक, धर्मज्ञ होने के साथ-साथ रूप वान भी थे I उनके छोटे भाई का नाम श्रीपुष्कर था I रानी दमयंती भी बहुत रूपवती थी उनके रूप सौंदर्य पर देवता भी मोहित थे और किसी
राजा हरिश्चंद्र की जीवनी-Biography of Raja Harishchandra राजा हरिश्चंद्र सूर्यवंशी वंश के प्रतापी राजा थे, जो सत्य और न्याय के प्रति अपनी निष्ठा के लिए प्रसिद्ध थे। वे अयोध्या के शासक थे और उनके शासन में सत्य और धर्म का बोलबाला था। उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा की रक्षा के लिए अपना राज्य, संपत्ति और यहाँ तक
शनिदेव पर तेल चढ़ाने का रहस्य एक बार हनुमान जी भगवान श्री राम की भक्ति में लीन थे और ये सर्वविदित है कि शनिदेव जी स्वभाव से उद्दंड थे तो उन्होने उछल-कूद मचाते हुए राम भक्त हनुमान जी को युद्ध के लिए ललकारने लगे I हनुमान जी ने भक्ति बीच में छोड़ कर शनिदेव जी